Computer kya hai? Computer ke bare mein पूरी जानकारी

Computer विषय ही इंटरेस्टिंग है। अगर आप भी computer kya hai ? या फिर computer ke bare mein जानने के लिए उत्सुक है तो आपके लिए एक मजेदार पोस्ट होनेवाली है।

इस पोस्ट में आप जानेगे की computer kya hai, कैसे काम करता है, Computer kitane prakar ke hote hai होते है। computer कैसे उपयोग में लिया जाता है, और बहोत कुछ जो आप जानना चाहते हो।

क्या आपको पता है computer को सिर्फ calculation करने के लिए ही बनाया गया था और आज यह जानकर हैरानी होनी चाहिए की आज के दिनों में कंप्यूटर का उपयोग कृत्रिम मानव बुद्धि (Artificial Intelligence) का निर्माण करने के लिए हो रहा है। 

यानि की इंसान एक ऐसा मशीन बनाने जा रहे है जो खुद सोच सके और अपने आप निर्णय ले सके। और ऐसा कुछ हद तक बन भी गया है। आपको पता ही होगा की कैसे Alexa, Google Echo dot, Google mini home जैसे Devices बाजार में उपलब्ध है जो आपके वौइस् कमांड पे एक्शन लेते है।

Computer kya hai ? computer in hindi

तो शुरुआत होती है पहले सवाल से की computer kya hai? (What is computer in hindi?)

आप जानते ही है की कम्प्युटर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो बिजली या फिर बैटरी से चलता है। 

कम्प्युटर का जो इंग्लिश शब्द है “computer” वह लैटिन शब्द “computare” से बना हुआ है जिसका मतलब होता है calculate (गिनना) या Programmable Machine (ऐसी मशीन जो आदेश के अनुशार काम करे)। सहीमें कम्प्युटर बिना प्रोग्राम के  कुछ नहीं कर सकता।

कम्प्युटर का जो काम है इसे तीन हिस्सों में बाँट सकते है अगर इसे तीन सब्दो में कहे तो Input, प्रोसेसिंग (processing) और आउटपुट (output)।

मतलब की डाटा को लेना उसपे प्रोसेसिंग करना और डाटा को दिखाना। इसके बारे में डिटेल में आगे देखेंगे की कैसे कंप्यूटर को कुछ हद तक मानव शरीर से तुलना कर सकते है।

Interesting Fact

यह एक Interesting Fact है की, दुनिया का पहला कम्प्युटर जो किसी इलेक्टॉनिक्स इंजीनियरने नहीं बनाया बल्कि एक मैकेनिकल इंजीनियर ने बनाया था।
और वह कम्प्युटर इलेक्ट्रॉनिक नहीं बल्कि मैकेनिकल था जो पंच कार्ड से चलता था और उस मैकेनिकल इंजीनियर का नाम था Charles Babage

नाम मत भूलना Charles Babage जिन्होंने पहला कम्प्युटर बनाया जो mechanical था ना की इलेक्ट्रॉनिक्स।

computer kya hai
Charles Babage का बनाया हुआ पहला Mechanical Computer

पहली पीढ़ी First Generation Computers “Vaccume Tubes”

धीरे धीरे उस कम्प्युटर में विकाश हुआ पहले मैकेनिकल था वह इलेक्ट्रॉनिक बना और वह vaccume tube पे चलता था।

 vaccume tube का उपयोग circuitry के लिय उपयोग होने लगा और स्टोरेज के लिए मेग्नेटिक ड्रम का इस्तेमाल हुआ।

Vaccume tube के कारन इसका साइज एक रूम के जितना था और हीटिंग प्रॉब्लम की वजह से ज्यादा समय के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता था।

 अगर रूम जितना होगा तो उसको चलाने में बिजली भी ज्यादा खर्च होगी इस वजह से Vaccume tube इतनी सफल नहीं रही। 

कम्प्युटर को चलने के लिए vaccume tube का एक विकल्प चाहिए था जो साइज में vaccume tube से बहुत ही छोटा जो कम बिजली खर्च करे और हीट प्रॉब्लम भी ना हो।

दूसरी पीढ़ी Second Generation Computers “Transistors”

और तब १९६४ में सेकंड जनरेशन कम्प्युटर का जन्म हुआ जिसका कारन था ट्रांजिस्टर
ट्रांजिस्टर पर आज भी इंजीनियरिंग के स्टूडेंट स्टडी करते है। 

अगर ट्रांजिस्टर के कार्य को देखा जाए तो basically यह दो तरीके से काम करता है 
(1) यह एक स्विच की तरह काम करता है जो current देने से ON और OFF होता है, और
 (2) ट्रांजिस्टर को एम्पलीफायर बना सकते है जो weak सिग्नल को amplify करेगा और उसको बड़ा बना देगा।  मतलब की अगर छोटी आवाज़ है तो ट्रांजिस्टर का use करके amplify करके उसे ऊंची बना सकते है। जो आज के होम थिएटर में होता है।

ट्रांजिस्टर के और कई सारे उपयोग है और इसके ऊपर काफी रिसर्च भी हो रहा है।

तीसरी पीढ़ी Third Generation Computers “Integrated Circuit”

कम्प्युटर में ट्रांजिस्टर का इस्तेमाल करना यह तो एक शुरुआत थी। और रिसर्च के बाद पता चला की कम्प्युटर को और भी छोटा किया जा सकता है। तो अब ट्रांजिस्टर को छोटा कैसे किया जा सके इस्पे रिसर्च हुआ। 

सन १९६४ में पहेली बार इंटीग्रेटेड सर्किट (Integrated Circuit– IC) का उपयोग हुआ इस इंटीग्रेटेड सर्किट में यह होता है की Transistors को एक साथ एक सिलिकॉन चिप में डाला जाता है, और तब कंप्यूटर के थर्ड जनरेशन का उदय हुआ।

इससे यह हुआ की जो ट्रांसिस्टर्स अलग अलग से जो सर्किट पर थे उसको एक साथ कम जगह में बारीकी से सिलिकॉन चिप में बिठाया गया इससे यह फायदा हुआ की ट्रांसिस्टर्स-ट्रांजिस्टर की बिच जगह कम हो जाने पर प्रोसेसिंग स्पीड (processing speed) बढ़ गई और कम बिजली पे कम्प्युटर चलने लगे, हीटिंग प्रॉब्लम भी काफी हद तक कम हो चुकी थी। 
जो पुराने कम्प्यूटर्स थे उसे ऑपरेट करने के लिए काफी सारी जानकारी चाहिए होती थी और वह उतना आसान नहीं था।  लेकिन इस थर्ड जनरेशन के कंप्यूटर के साथ कीबोर्ड और ऑपरेटिंग सिस्टम को भी शामिल किया गया जो कंप्यूटर को यूजर-फ्रेंडली(User-friendly) बनाते थे।

चौथी पीढ़ी Fourth Generation Computers “Microprocessor”

अब यह कहा रुकने वाला था कम्प्युटर को और भी छोटा करना अब इतना मुश्किल नहीं था। अगर scientist Transistors को छोटा करके सिलिकॉन चिप में इंटेग्रटे कर सकते है तो वे Integrated Circuit- IC को छोटी करके एक और सिलिकॉन चिप में एम्बेड भी कर सकते है जिसे मइक्रोप्रोसेस्सर (Microprocessor) कहते है।

और इस तरह कम्प्युटर और भी छोटे हो गए ।  

इस सारे कम्प्युटर के विकाश में अगर किसी एक component को क्रेडिट देना चाहिए तो वो है ट्रांजिस्टर। अगर ट्रांजिस्टर नहीं बनता तो शायद कंप्यूटर की साइज छोटी न होती और सायद कंप्यूटर आम आदमी के लिए अवेलेबल ही नहीं होता।

पांचवी पीढ़ी Fifth Generation Computer “Artificial Intelligence”

अगर फिफ्थ जनरेशन कम्प्यूटर्स की बात करे तो फिफ्थ जनरेशन आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के बेस पर है। इसका उद्देस्य ऐसी डिवाइस बनाना है जिसे चलने के लिए कोई टेक्निकल नॉलेज की जरूर न पड़े, जिसे रोज-बरोज की भाषा से ऑपरेट किया जा सके।
जिसके उदहारण है आजके लैपटॉप, नोटबुक, अल्ट्राबुक जिसमे ULSI (Ultra Large Scale Integration) technology इस्तेमाल हो रहा है।

 जिसमे एक माइक्रोप्रोसेसर चिप में 1 करोड़ से भी ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेन्ट का इस्तेमाल होता है।
 इसके साथ साथ आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के विकास के कारन और नयी नयी technology विकसित हुई जैसे की स्पीच रिकग्निशन (speech recognition), पैरेलल प्रोसेसिंग (parallel processing), क्वांटम कैलकुलेशन (Quantum Calculation)…

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कम्प्युटर का अविष्कार (Invention of Computer)

जैसे की आप जानते है की जो पहला कंप्यूटर बना था वह Charles Babage ने बनाया था और वह मैकेनिकल कंप्यूटर था।

लेकिन उस मैकेनिकल कंप्यूटर में कुछ खास बात थी।

computer kya hai

 Charles Babage के मैकेनिकल कंप्यूटर जिसे एनालिटिकल इंजन भी कहते है उसमे खास कॉन्सेप्ट्स जैसे की ALU (अरिथमैटिक लॉजिकल Unit), बेसिक फ्लो कण्ट्रोल और इंटीग्रेटेड मेमोरी लागु किये गए थे।

आज के कम्प्यूटर्स में इसी concept का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर में तो बहुत लोगो का योगदान है मगर Charles babage को ही कंप्यूटर के जनक यानि की पिता कहा जाता है। 

computer कैसे कार्य करता है? how computer works?

तो आपने जाना की computer kya hai ? computer का इतिहास क्या है और इसका अविष्कार किसने किया था। अब यह भी जानना जरुरी है की कम्प्युटर कैसे कार्य करता है। क्युकी कम्प्युटर को troubleshoot करने के लिए उसका कार्य समझना जरुरी है।अगर आपको कम्प्युटर के कार्य को समझना है तो पहले आपके शरीर को समझना होगा और इस तरह से बहुत ही सरल तरीके से आप computer के कार्य को समज सकेंगे।

Input

अगर आप अपने शरीर को देखे तो एक मानव शरीर में पांच इन्द्रिय होती है, जिससे इनफार्मेशन दिमाग में जाती है। 

जैसे की पहेली इन्द्रिय है जो आपकी आँख जो चित्र को देखती है और उस चित्र को आपके दिमाग में पहोचती है।
दूसरी इन्द्रिय कान, आवाज़ को सुनने का काम करता है और आवाज़ की जानकारी दिमाग को मिलती है।

 तो इस पांचो इन्द्रिय को कंप्यूटर की भाषामे कहे तो इसे Input Devices कहेगे। और कंप्यूटर में कीबोर्ड और माउस मुख्य इनपुट डिवाइस होते है। लेकिन इसके अलावा माइक्रोफोन है जो आवाज़ को इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल में कन्वर्ट करके computer को देता है इसी तरह कैमरा भी चित्र को इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में कन्वर्ट करके कम्प्युटर को भेजेगा। और कई सारे इनपुट Devices है जैसे की स्कैनर, Fingerprint scanner, joystick.. ।

Processing

दिमाग के मुख्य दो कार्य है जो इन्द्रिय से जानकारी मिलती है उसको प्रोसेस करना और दूसरा मिली हुई जानकारी को स्टोर करना।
इसीलिए अगर आप किसी आवाज़ को सुनते है तो दिमाग उस आवाज़ को रेकग्निज(recognize) करेगा और उस आवाज़ को पहचानने की कोशिश करेगा और साथ ही में उसको याद भी रखेगा।

इसी तरह CPU का कार्य Input Devices से मिली इनफार्मेशन को प्रोसेस करना, स्टोरेज डिवाइस में स्टोर करना और आउटपुट डिवाइस से आपको दिखाना।

Output

जैसे आप अपने पास स्टोर की गयी इनफार्मेशन को दुसरो के साथ बोलके या फिर इशारो में शेयर करते है। इसी तरह जो monitor है उसका काम आपको चित्र के रूप में इनफार्मेशन को दिखाना है और audio को सुनाने के लिए speaker या फिर कंप्यूटर से जुडी हुई sound सिस्टम का इस्तेमाल होता है। 

कम्प्युटर पार्ट्स | components of computer

अगर आपने कभी भी डेस्कटॉप कंप्यूटर या फिर लैपटॉप को खोलके देखा होगा तो उसमे एक ग्रीन कलर की बड़ी प्लेट पे छोटे-छोटे कंपोनेंट्स जुड़े हुए पाए होंगे और कई सारे devices जो आप उनके बारे में जानेगे और उसके कार्य को भी समजेंगे । अगर आप technical बैकग्राउंड से न हो तो इसमें इस्तेमाल किये गए शब्दो को याद जरूर रखना ये आपको नए कंप्यूटर खरीदने में या फिर पुराने कम्प्यूटर्स को repaire करवाने में मदद होंगे।

computer parts

Motherboard

पहले बात करते है वो ग्रीन कलर की प्लेट के बारे में जो कम्प्युटर खोलते ही आपके सामने दिखती है।

 उस प्लेट को MOTHERBOARD कहते है। motherboard कम्प्युटर का मुख्य सर्किटबोर्ड होता है जो कई सारे कंपोनेंट्स से जुड़ा हुआ होता है।
motherboard से जुड़े हुए कंपोनेंट्स को देखे तो उसमेँ आते है RAM, हार्ड डिस्क, CPU, एक्सपेंशन कार्ड्स, और कई सारे पोर्ट्स के कनेक्शंस।  

अगर आप के मन में यह प्रश्न हो की motherboard ग्रीन कलर का ही क्यों?
इसका कारन यह है की सर्किट बोर्ड को प्रोटेक्ट और insulate करने के लिए उसपे सोल्डर मास्क की कोटिंग लगाई जाती है और दूसरा यह भी कारन है की ग्रीन कलर को इस्तेमाल करना एक ट्रेडिशन था।   मगर आज ग्रीन के अलावा ब्लैक, रेड और येलो कलर में भी अवेलेबल है।

Power Power Supply- SMPS (स्विच मोड पावर supply)

 आप जानते होंगे की हमारे घर में जो बिजली आती है वो AC सप्लाई होता है।
 तो AC सप्लाई से कोई भी डिजिटल Devices को चला नहीं सकते। 

अगर AC सप्लाई पे कोई भी डिजिटल Device चलाना है तो उसे DC में कन्वर्ट करना ही पड़ेगा। तो इसके लिए कोई ऐसा कॉम्पोनेन्ट चाहिए जो AC पावर सप्लाई को DC पावर सप्लाई में कन्वर्ट करे।
 कंप्यूटर में SMPS (Switched mode power supply) होता है जो AC पावर सप्लाई को कन्वर्ट करके DC में कन्वर्ट करके और अलग अलग वोल्टेज लेवल को generate  करता है। 
 जो अलग-अलग कॉम्पोनेन्ट जैसे की motherboard, DVD राइटर, हार्ड डिस्क को पावर देता है। इसी लिए बिना SMPS के कंप्यूटर स्टार्ट ही नहीं हो सकता। अगर आपका कंप्यूटर स्टार्ट ही नहीं हो रहा तो उसका एसएमपीएस चेक करिये।

हार्ड-डिस्क Hard Drive

हार्ड-डिस्क का काम होता है डाटा को स्टोर करना। कंप्यूटर में ऑपरेटिंग सिस्टम होती है वह भी हार्ड डिस्क में ही install होती है।
हार्ड-डिस्क में स्टोर की गई इनफार्मेशन लम्बे समय के लिए रहती है। और पावर कट होने पर भी डिलीट नहीं होती इसीलिए हार्ड-डिस्क को नॉन-वोलेटाइल मेमोरी (Non-volatile memory) भी कहा जाता है।

दोस्तों हार्ड ड्राइव जो होती है वो दो तरह की होती है (1) HDD हार्ड ड्राइव और (2) SSD हार्ड ड्राइव।

पुराने कंप्यूटर होते है उसमें HDD हार्ड ड्राइव का इस्तेमाल होता था और आज भी कई सारे कंप्यूटर में HDD हार्ड ड्राइव देखने को मिलेगी।
 HDD हार्ड ड्राइव में एक मैग्नेटिक प्लेट होती है जो डाटा को स्टोर करने के लिए इस्तेमाल की जाती है मगर यह मैग्नेटिक प्लेट कुछ सालो में ही ख़राब हो जाती थी।
इसलिए नयी हार्ड ड्राइव मार्किट में आयी जिसे SSD हार्ड ड्राइव कहते है। 

SSD का पूरा नाम सॉलिड स्टेट ड्राइव(Solid state drive) है। और इसमें स्पिनिंग प्लेट के बदले मेमोरी कार्ड जैसी फ़्लैश मेमोरी चिप होती है जो लम्बे समय तक ख़राब नहीं होती।

इसलिए अगर आप नया कंप्यूटर या हार्ड-ड्राइव लेना चाहते है तो यह ध्यान रखिये की हार्ड ड्राइव जो है वो SSD होनी चाहिए ना की HDD। यह आपके कंप्यूटर को लम्बे समय तक चलने में मदद करेगा।

 RAM (RAM kya hai ?)

RAM का पूरा नाम है Random Access Memory।
कम्प्युटर RAM का इस्तेमाल टेम्पररी स्टोरेज के लिए करता है।

अगर कोई प्रोग्राम रन हो रहा है तो वो पहले RAM में स्टोर होगा और फिर CPU में प्रोसेस होगा । कोई भी सॉफ्टवेयर में तैयार किया गया डॉक्यूमेंट डायरेक्ट हार्ड ड्राइव में स्टोर नहीं होता बल्कि पहले RAM में स्टोर होता है अगर आटोमेटिक सेव हो जाता है तो बादमें हार्ड-ड्राइव में स्टोर होगा।

अगर कम्प्युटर पे काम करते समय बिजली चली जाती है तो RAM में स्टोर की गई इनफार्मेशन डिलीट हो जाएगी। इसी कारन से RAM को Volatile Memory भी कहा जाता है। तो कभी भी अपने डॉक्यूमेंट पे लम्बे समय तक काम करते वक्त बिच-बिच में उसे सेव भी करते रहिए।

अगर आप टेक्निकल बैकग्राउंड से होंगे तो यह सुना होगा की जीतनी बड़ी RAM उतनी ही ज्यादा कम्प्युटर की स्पीड होगी। मगर यह थोड़ी misunderstanding है।

RAM की साइज बड़ी होने से यह फायदा होगा की कम्प्युटर Multi-tasking अच्छी तरह से कर पायेगा मतलब की एक साथ दो-तीन सॉफ्टवेयर आराम से रन हो पाएंगे।

अगर कम्प्युटर की स्पीड जाननी है तो उसकी क्लॉक-रेट(clock rate) से पता चलता है। जीतनी ज्यादा क्लॉक-रेट उतनी ज्यादा कंप्यूटर की स्पीड होगी। 
जब आप कम्प्युटर के डेस्कटॉप पर My computer के आइकॉन पर राइट-क्लिक करके प्रॉपर्टीज को क्लिक करेंगे तो कंप्यूटर के बारेमे जानकारी मिलेगी।
 उसमें देखेंगे की प्रोसेसर स्पीड जो है उसमेँ 2.80 GHz या 3 GHz है उसका मतलब यह होता है की 
कम्प्युटर की क्लॉक एक सेकंड में 2800000000 बार ON -OFF होगी।

Interesting Fact
क्या आपको पता है? NASA के अपोलो 11 मिशन में पहेली बार जब नील आर्मस्ट्रांग spaceflight से चाँद पर गए थे तब उसमे इस्तेमाल किये जानेवाले कम्प्युटर की RAM सिर्फ 71 KB थी।

CPU

अब बात करते है कम्प्युटर के दिमाग यानि की CPU की जो पुरे कम्प्युटरको नियंत्रण करता है। CPU का पूरा नाम है सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit)।

अगर आपको देखना है तो ये कम्प्युटर केस के अंदर motherboard पे होगा। यही एक CPU की कीमत कम्प्युटर के सारे पार्ट्स से ज्यादा होती है।
 CPU का काम कम्प्युटर में चल रहे सॉफ्टवेयर और प्रोग्राम के कार्य अंजाम देना है। मतलब CPU ही किसी सॉफ्टवेयर या प्रोग्राम को RAM से लेके रन करेगा। जो RAM के टॉपिक में क्लॉक रेट की बात की थी वो CPU में ही होता है। और इसीसे ही प्रोसेसर की स्पीड तय की जाती है।

Computer Hardware and Software

कम्प्युटर हार्डवेयर और कम्प्युटर सॉफ्टवेयर

कम्प्युटर हार्डवेयर उसे कहा जाता है जिसे हम देख सकते है और टच भी कर सकते है।

 जैसे की मॉनिटर, माउस, कीबोर्ड जैसे फिजिकल Devices ।

कम्प्युटर सॉफ्टवेयर उसे कहा जाता है जिसे हम देख तो सकते है लेकिन छू नहीं सकते। जैसे की इंटरनेट ब्राउज़र, इमेज फाइल्स, वीडियो, ऑपरेटिंग सिस्टम।

कम्प्युटर को चलाने के लिए दोनों जरुरी है। 

कम्प्युटर के प्रकार: Types of computer in hindi

Computer kitane prakar ke hote hai

आपने computer kya hai ये तो जान लिया मगर कम्प्युटर कितने प्रकार के होते है यह जानना भी जरुरी है। शायद कुछ प्रकार के कम्प्युटर को आप जानते ही है और कुछ नए कम्प्युटर के बारे में भी जानेगे। चलिए देखते है।

सबसे पहले जो पुराने कम्प्युटर आपने देखे होंगे तो वो थे डेस्कटॉप कम्प्यूटर्स।

Desktop कम्प्यूटर्स में मॉनीटर्स, कीबोर्ड्स, माउस, (CPU) कम्प्युटर case अलग-अलग और केबल से जुड़े हुए होते है। यह आपने स्कूलो में, बैंक में, हॉस्पिटल में या फिर अपने घर पर ही देखे होंगे। 

लैपटॉप

लैपटॉप के बारे में आप शायद ज्यादा जानते होंगे। लैपटॉप दोनों बैटरी और बिजली पे चलता है। और आज मार्किट में एक से बढ़कर एक नयी नयी टेक्नोलॉजी वाले लैपटॉप अवेलेबल है।

टेबलेट

टेबलेट का साइज लैपटॉप से और भी छोटा होता है। उसका लाइट-वेट और पोर्टेब्लिटी के कारन एक समर्टफोन की तरह कहीं ले जा सकते है। इसमें कीबोर्ड या माउस नहीं होता मगर स्मार्टफोन की तरह टच स्क्रीन होती है जो टेबलेट को चलने में और भी यूजर-फ्रेंडली बनती है।

सर्वर

अगर आपने कम्प्युटर को पूरी तरह जान लिया तो सर्वर को जानना इतना कठिन नहीं है। सर्वर का उपयोग बड़ी-बड़ी ऑनलाइन-कंपनी जैसे की फेसबुक, गूगल, या अमेज़न अपने डाटा को स्टोर करने के लिए करते है। 

एक नार्मल कम्प्युटर और सर्वर में यह फर्क होता है की सर्वर में जो RAM, स्टोरेज और प्रोसेसर होते है वे कैपेसिटी में कम्प्युटर से कई लाख गुना ज्यादा होते है। मतलब की जितना आपके कम्प्युटर का हार्ड-ड्राइव का स्टोरेज उतना या उससे भी ज्यादा सर्वर की RAM होगी।

palmtop

पाम का मतलब होता है हथेली। तो अब आप जान ही गए होंगे की इस कम्प्युटर की साइज कितनी होगी। पाल्म्टॉप ऐसा कम्प्युटर है जिसकी साइज आपके हाथ की हथेली के जीतनी होगी।

स्मार्टफोन:

आज के नए स्मार्टफोन को भी कम्प्युटर कहना गलत नहीं है। क्युकी इसमें इस्तेमाल किये जाने वाले प्रोसेसर जैसे की Qualcomm स्नैपड्रगनapple A 13 (एप्पल का processor), हुआवेई किरिन 990 कम्प्युटर के जितने ही तेज है। 

आज की कम्प्युटर की फिफ्थ जनरेशन कम्प्युटर में कई कदम आगे निकल चुकी है। अब कम्प्युटर और इंटरनेट के इस्तेमाल से कोई भी चीज़ को कण्ट्रोल करना संभव हो गया है। जिसे IOT (इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स) कहते है। IOT के इस्तेमाल से कोई भी मशीन को ऑटोमेट किया जा सकता है। अब तो आटोमेटिक ड्राइवर-लेस्स कार का भी प्रोटोटाइप तैयार हो गया है।

कम्प्युटर का उपयोग: Applications of Computer

कम्प्युटर और इंटरनेट के विकास ने तो सब कुछ सरल और online बना दिया है। अब कुछ भी खरीदने के लिए बाजार में जाने की जरुरत नहीं है इ-कॉमर्स साइट से कुछ भी घर-बैठे मंगवा सकते है। पैसो की लें-दें करने के लिए घर से बहार जाने की जरुरत ही नहीं। ऑनलाइन ट्रांसक्शन घर बैठे हो सकता है। कुछ भी सीखने के लिए कहीं भी जाने की जरुरत नहीं सिर्फ घरपे कम्प्युटर और इंटरनेट ही काफी है।

तो जानते हे किस-किस जगह पर और कोनसे कार्य के लिए कम्प्युटर का उपयोग होता है।

(1) गवर्नमेंट

ऐसा हो ही नहीं सकता की आप किसी भी गवर्नमेंट ऑफिस में जाये और कम्प्युटर को न देखे। क्युकी गवर्नमेंट भी सभी जानकारी और कई साडी प्रोसेस को ऑनलाइन अवेलेबल बना रही है। जैसे की आप अपना आधार कार्ड ऑनलाइन ही डाउनलोड कर सकते है।

(2) रिसर्च एंड डेवलपमेंट

विज्ञान के क्षेत्र में कम्प्युटर का उपयोग नयी नयी टेक्नोलॉजी के रिसर्च में होता है।

(3) स्कूल और कॉलेज

स्कूल में कम्प्युटर लैब तो होती ही है मगर स्टूडेंट्स को घर बैठे भी कुछ भी सीखने की आज़ादी मिलती है।

 (4) बिज़नेस

कुछ ट्रेडिशनल बिज़नेस को छोड़कर आज के सारे बिज़नेस जो है कम्प्युटर पे निर्भर होते चले जा रहे है। सिर्फ कम्प्युटर और इंटरनेट के उपयोग से आप घर बैठे भी अच्छी इनकम बना सकते है।

और कई सारी जगह जैसे की हेल्थ & मेडिकल फील्ड, डिफेन्स, सभी जगह कम्प्युटर का उपयोग बढ़ता जा रहा है।

कम्प्युटर का भविष्य (Future of Computers)

भूतकाल में कम्प्युटर में बहोत से परिवर्तन आये है और आगे भी लोगो की जरुरत के अनुसार परिवर्तन आते जायेगे।
 पहले जो कम्प्युटर 30 ton के भरी और एक बड़े रूम के जितने थे उसमें आज इतना परिवर्तन आया है की एक हथेली में समां जाये। 

तो कम्प्युटर का उपयोग जो है वो बहुत सारी फील्ड में होने लगा है। और सायद हर मुश्किल का समाधान कम्प्युटर और इंटरनेट दे सकता है।

आज के समय में कम्प्युटर और इंटरनेट के कारन सभी काम सरल होते जा रहे है और हर जगह इसका इस्तेमाल हो रहा है।

 

अगर आज की बात करे तो दुनिया के सबसे बड़े Entrepreneur Elon Musk की कंपनी Neurolink जो इँसानी दिमाग को कम्प्युटर के द्वारा कैसे पढ़ा जाये उसपे काम कर रही है। यह कंपनी दिमाग और कम्प्युटर के तालमेल से कैसे इंसान को डायरेक्ट कम्प्युटर से जुड़ा जाये इस पर काम कर रही है।

और भी देखा जाये तो IOT जो इंटरनेट और कम्प्युटर की मदद से कोई भी चीज़ को दूर से ही नियंत्रण करने का कार्य करती है। IOT अपने आप में ही एक पूरी फील्ड है।

आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के बारेमेँ तो आप जानते ही होंगे जो मशीन को खुद ही निर्णय देने की काबिलियत देने पर काम किया जा रहा है।

तो इस पोस्ट से आपने सीखा की computer kya hai ? इसका इतिहास क्या है और किसने अविष्कार किया था। इसके साथ साथ कम्प्युटर कैसे कार्य करता है और हार्डवेयर सॉफ्टवेयर क्या है। और लास्ट में कम्प्युटर का उपयोग और भविष्य  देखे। 

अगर आपको और भी कम्प्युटर रिलेटेड जानकारी चाहिए तो उसके टॉपिक के नाम comment section में suggest कीजिये और यह पोस्ट कैसी लगी यह भी बताइये। 

 

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