Guru Nanak Ji के जीवन से जुडी एक सीख

Guru Nanak ji के बारे में

दोस्तों सिखों के प्रथम गुरु कहे जानेवाले Guru Nanak साहेब का जन्म कार्तिक पूर्णिमा १४६९ में तलवंडी नाम के एक गांव में हुआ था जो आज Guru Nanak ji के नाम से ‘ननकाना’ के नाम से जाना जाता है। Guru Nanak ji जन्म से ही इतने प्रखर बुद्धिमान थे की उनके भगवत्प्राप्ति के सम्बंधित प्रश्नो के अध्यापको के पास कोई जवाब नहीं थे इस वजह से उनका ७-८ साल की उम्र में अभ्यास छूट गया। 

Guru Nanak Sahebji का बचपन

गुरु नानकजी के बचपन का एक प्रसंग बहुत ही मशहूर है जब गुरु नानकजी 5 साल के थे तब उनके पिताजी ने पढाई के लिए उन्हें एक मौलवी के पास भेजा। जब मौलवीजी ने गुरु नानकजी की पट्टी पर  ॐ लिखा तब उन्होंने १ॐ  लिखकर यह सन्देश दिया की भगवान सिर्फ एक है और हम सब उस एक भगवान् की संतान है । मौलवीजीने उनके पिताजी के पास जा कर बोला कि उनका पुत्र तो एक ‘अलाही नूर’ है, ‘उसको वह क्या पढ़ाएगा, वह तो स्वयं समस्त संसार को ज्ञान देगा।’

ऐसे गुरु नानकजी के जीवन से जुड़ा एक अनोखा प्रसंग जो हमें एक जीवनको बहेतर तरीके से जीने की सीख देता है।

Guru nanak ji के जीवन से जुड़ा प्रसंग

एक दिन गुरु नानकजी उनके मित्र को मिलने उसके गांव गए थे। गांव पहुंच कर वे देखते है की वहा बहुत सारे लोग भूखे थे और बीमारी के कारन मर रहे थे। मित्र के घर जाकर उन्होंने देखा की वहा पैसो का ढेर लगा हुआ था। उनका मित्र बहुत अमीर था और वह इतना अमीर था की उसे लोगो का दर्द ही नहीं महसूस हुआ। और ना ही उन लोगो के लिए उसके पास वक्त था। 

गुरु नानक जी उससे मिलते है और उसे एक सुई देते है। और उसे कहा की- ‘ये सुई अपने पास रख यह बहुत ही कीमती सुई है और अगली बार जब में मिलु तब ये मुझे वापस कर देना’। उसने सोचा की इतने सारे पैसो में यह सुई कहा रखुगा उसने गुरु नानक जी से कहा की- ‘अगर कल मुझे कुछ हो गया तो में यह सुई आपको वापस कैसे कर पाउँगा।’ 

गुरु नानक जी कहते है की कोई बात नहीं इस लोक में नहीं तो दूसरे लोक में लौटा देना। मित्र ने कहा भला इस दुनिया कोई कुछ ले जा सकता है क्या। मित्र की बात सुनते ही गुरु नानक वहाँ से चले जाते है और उनका मित्र समज जाते है की गुरूजी क्या कहना चाहते है। 

Life lesson from the story: Guru Nanakji

इस दुनिया से किसी को कुछ लेकर नहीं जाना है। जीवन बहुत छोटा है इस छोटे से जीवन में लोगो की मदद करो, सबसे प्यार करो और हर हाल में खुश रहना सीखो। अपने आने वाले कल में जीने के बदले आज को ईमानदारी से जीना सीखिए । अपने बीते वक्त से सीख लेकर अपने आज के वक्त को अपने सपने पुरे करने में लगाइए।

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